लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी की तैयारियों और रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरा प्रत्याशी उतारने को लेकर पहले संकेत दिए गए थे, लेकिन पार्टी ने इस चुनाव में बीजेपी के खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब उनकी नजर तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है। बीजेपी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा पर तंज कसा है।
नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने लखनऊ स्थित विधानभवन में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य तथा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे। नामांकन के बाद उम्मीदवारों ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताया और पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने की बात कही।
राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए बीजेपी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को भी प्रत्याशी बनाया गया है।
बीजेपी के उम्मीदवारों में तीन सवर्ण, तीन ओबीसी और दो दलित चेहरे शामिल हैं। पार्टी के इस चयन को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। नए चेहरों को मौका देने के साथ संगठन में सक्रिय और समर्पित नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की बात भी सामने आई है।
राज्यसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले को राजनीतिक विश्लेषक आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की रणनीति और राजनीतिक संदेश के संदर्भ में देख रहे हैं। वहीं, बीजेपी के आठ उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति में पार्टी को राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से सभी आठ सीटें मिलने की संभावना है।
