भोपाल। भोपाल में डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ का विशेष प्रदर्शन, निदा फ़ाज़ली की शायरी साझा संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘क़लम की रोशनी’ में साहित्य और मानवीय मूल्यों पर परिचर्चा, फ़िल्मकारों और साहित्यकारों ने निदा फ़ाज़ली के योगदान को किया याद भोपाल में साहित्यिक श्रृंखला ‘क़लम की रोशनी’ के अंतर्गत राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ का विशेष प्रदर्शन और परिचर्चा आयोजित की गई। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी एवं संस्कृति विभाग के आयोजन में पद्मश्री निदा फ़ाज़ली के जीवन, साहित्य और विचारों पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि निदा फ़ाज़ली की शायरी भारतीय साझा संस्कृति, प्रेम, संवेदना और आपसी सद्भाव की अमूल्य धरोहर है। परिचर्चा में फ़िल्मकार रूमी जाफ़री, पद्मश्री शीन काफ़ निज़ाम, शायर मदन मोहन मिश्रा ‘दानिश’ और निर्माता अतुल गंगवार ने विचार रखे। संचालन डॉ. नुसरत मेहदी ने किया।
भोपाल में डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ का विशेष प्रदर्शन और परिचर्चा आयोजित
