नैनीताल। यह जनहित याचिका पंगोट के पूर्व ग्राम प्रधान ललित चंद्र आर्य द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया था कि बिल्डरों ने वन क्षेत्र में पैदल मार्ग को सड़क बनाने से रोका जाए और उन्हें नैना देवी बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व और उसके आसपास जेसीबी जैसी भारी मशीनरी का उपयोग करने की अनुमति न दी जाए। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि अवैध निर्माण के कारण प्रवासी पक्षियों के पथ व गलियारे और क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की पहचान कर प्रभावी उपाय किए जाएं।
याचिका में बताया गया कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए ग्राम पंचायत ने वर्ष 2013 में ग्रामीण पैदल मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव सौंपा था। जिसे राज्य सरकार ने 14 अगस्त 2015 को सशर्त मंजूरी दी थी। लेकिन रिजॉर्ट स्वामियों ने इस मंजूरी का दुरुपयोग करते हुए वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और भारी मशीनरी का इस्तेमाल करके इसे अवैध रूप से मोटर मार्ग में बदलना शुरू कर दिया। इस मामले में प्रभागीय वनाधिकारी, नैनीताल द्वारा बताया गया कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत दो अलग-अलग आपराधिक वाद सतीश चंद्र और उपेंद्र जिंदल के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नैनीताल की अदालत में दायर की है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत से ट्रायल पूरा करने के निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।
