रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि-चाका मार्ग पर बनी ट्रॉली खराब हो जाने से ग्रामीणों की रोज़मर्रा की जिंदगी पूरी तरह ठप हो गई है। मंदाकिनी नदी के किनारे बने पैदल मार्ग पर भूस्खलन आने से स्कूली बच्चे, दूध सब्जी बेचने वाले ग्रामीण जान हथेली पर लेकर अगस्त्यमुनि आ रहे हैं। वहीं सड़क मार्ग भी गंगानगर के पास बार-बार अवरूद्ध होने से ग्रामीणों की दूध-सब्जी आये दिन खराब हो रही है।
अगस्त्यमुनि के ठीक सामने मन्दाकिनी नदी के पार कई गांव बसे हैं, जो दूध एवं सब्जी बेचने प्रतिदिन अगस्त्यमुनि आते हैं। जिससे उनका घर खर्च चलता है। ग्रामीण कई वर्षों से अगस्त्यमुनि से चाका के लिए एक अदद पुल की मांग कर रही है, मगर केवल आश्वासन ही मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में रहते हुए तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री मातवर सिंह कंडारी ने पहली बार इसकी घोषणा की थी, लेकिन तब से कई सरकारें आई और गई। घोषणा हर सरकार ने की, मगर पुल नहीं बना। वर्ष 2022 में सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया, और अगस्त्यमुनि से चाका के लिए इलैक्ट्रिक ट्राली लगाने की घोषणा की। जिसका उद्घाटन करने जनपद के दोनों विधायक आये। ग्रामीण भी खुश हुए चलो कुछ नहीं से कुछ तो हो।
ट्राली लगने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिली तो पैदल रास्ते वीरान हो गये, मगर अब ट्राली बार-बार खराब होने लगी है। जिससे ग्रामीणां को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव की महिलाएं और किसान हर रोज़ दूध, सब्ज़ी व अन्य सामान बेचने विजयनगर और अगस्त्यमुनि जाते हैं। वहीं बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं स्कूल आते हैं, लेकिन भूस्खलन से रास्ता टूट गया और वैकल्पिक सहारा बनी ट्रॉली भी खराब हो चुकी है। क्षेत्र के ग्रामीणों का दर्द बयान करते हुए चाका गांव की सुलोचना देवी ने कहा कि साहब, ट्रॉली ही हमारी जान थी, अब वो भी बंद पड़ी है। अब तो रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया है। भूमा देवी ने कहा कि नीचे नदी गरज रही है, ऊपर पहाड़ गिर रहे हैं, अब हम जाएं तो जाएं कैसे? ऐसे में बच्चे कैसे स्कूल आयेंगे। हेमा देवी ने कहा कि अगस्त्यमुनि जाकर दूध और सब्ज़ी बेचना हमारी मजबूरी है, लेकिन ट्रॉली बंद होने से सब काम रुक गया है।
चाका गांव के ग्रामीण नारायण सिंह और भगवान सिंह ने भी प्रशासन से गुहार लगाई कि ट्रॉली की मरम्मत तत्काल कराई जाए, वरना गांव की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि ट्रॉली तुरंत दुरुस्त करवाई जाए और स्थायी रूप से सुरक्षित मार्ग भी बनाया जाए, ताकि हर साल भूस्खलन और नदी के डर से उनका जीवन मझधार में न फंसे।
